आओं एक दीप जलाये,
खुशियों की सौगाते लाये,
बेसहारों का सहारा बनें,
हर घर में उजाला फैलाये।
पावन दीवाली है आई,
दीपों से दुनियांँ है जगमगाई,
राम के आने की बजी बधाई।
जग में सबने खुशियाँ मनाई ।
घर घर में रंगोली सजी है,
हर चेहरे पे मुस्कान खिली है,
जग में दीपों की ज्योत जली है,
ज्ञान की प्रेरणा मन में पली है।
सत्य की सदा जीत हुई है,
राम जी को सिया मिली है,
असत्य की हार हुई है,
दुखों की परछाई हटी है।
खुशहाली चहूँ ओर छाई है,
मोरनी झुमझुम के नाची है,
राम नाम की धुन बाजी है,
लक्ष्मी जी की पूजाई है।
राग द्वेष से दूर होकर,
प्रेम की अलख जगाकर,
उन्नति और समृद्धि की,
मन में भावना है लेकर,
आओं एक दीप जलाऐ।
रचनाकार- आशा उमेश पान्डेय

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