कार्तिक महीना के जाय के बाद अगहन महीना लगथे।अउ अगहन महीना मा जउँन दिन बृहस्पत वार पड़थे उही दिन हमर छत्तीसगढ़ मा घरो घर अगहन बृहस्पति के तिहार बड़ उछाह ले मनाथे।बिकट मान गौण के साथ लक्ष्मी माता के पूजा करथे। बुधवार के संझा बेरा ले घर के साफ सफाई,अँगना परछी कुरिया के लिपाई।घर के मुहाटी मा सुघर चउँक पुरके महिला मन रंगोली बनाथे।लक्ष्मी माता ला जेन जघा मढ़ाथे उहूँ जघा ला सफ्फा करके चाउँर पिसान ला घोरके चउँक पूरथे।घर के ओंटा कोंटा के साफ सफाई करके लक्ष्मी माता के स्थापना करथे।सुघर आमा पत्ता, फूल पान,नरियर,आँवला फल,आँवला पत्ती,केरा पत्ता,
अउ,कंद मूल जिमी काँदा,धान के बाली मा सजा के कलश के स्थापना करथे।अउ बुधवार के रात मा सबो जूठा बरतन भाड़ा ला माँज के रखथे,अउ घर मुहाटी ले लक्ष्मी माता के वास तक चाउँर पिसान के सुघर पैर के छप्पा बनाथे।राते मा माता करा दीया जला के रखथे।
मुँधरहा ले घर के महिला मन उठ जाथे,नहा धोके घर के दुवारी,रंगोली अउ तुलसी चौंरा मा दीया जलाथे।दीया जलाके घर के दरवाजा ला खोल के रखथे।जेन हा दिन भर खुले रहिथें।पूजा पाठ करके महिला मन उपवास रहिथे अउ माता के ध्यान मा लीन रहिथे।अउ ये पूजा के एक ठन अउ खास बात हवै, बुधवारे के दिन महिला मन हा अपन अपन घर मा सबो मनखे ला चेता के रखे रहिथे आज चुंदी,नाखून नइ कटाना हे, साबुन से नहाना नइ हे,बाल नइ धोना हे,पइसा खरचा भी नइ करना हे,कपड़ा लफ्ता धोय के मनाही,नमक खाय के मनाही करके चेताँय रहिथे।माने भारी नियम धियम माने बर पड़थे। महिला मन सुघर नवा नवा साड़ी पहिन टिकली, माँहुर,काजर आँज अपन आप ला सुंदर अउ स्वच्छ बनाय रखथे।ये दिन पीला फल,पीला कपड़ा,पीला भोग के बड़ महत्व रहिथे।दान मा केला फल,भोग मा चना के दाल ला बड़ शुभदायी मानथे।
पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक पुन्नी के साथे मा अगहन के शुरुआत हो जथे, महिला मन अपन घर के सुख समृद्धि अउ यश, धन खातिर माता लक्ष्मी के आराधना करथे।येकर पीछू मान्यता इही हे कि माता लक्ष्मी अगहन महीना मा क्षीरसागर ले निकल पृथ्वी लोक मा विचरण करत रहिथें।जेन मन धरम करम से माता के पूजा पाठ करथे तेकर घर आके वोहा वास करथे।अउ ओकर घर मा सुख,शाँति,समृद्धि अउ ऐश्वर्य के वास हो जथे।इही मान्यता खातिर ये तिहार ला हमर छत्तीसगढ़ मा नियम धियम अउ पारंपरिक रूप ले मनाथे।ये दिन लक्ष्मी पूजा के साथे साथ सुरुज देवता के पूजा,शंख के पूजा अउ भगवान कृष्ण के पूजा ला भारी फलदायी मानथे।अइसे मान्यता हावय सुरुज देव के किरण हा कीटाणु ला नष्ट कर देथे अउ शरीर ला निरोग बनाथे।तेकर सेती सब बिहनिया बिहनिया जल चढ़ाके आशीष माँगथे।
एक उछाह अउ बिश्वास के साथ अगहन बृहस्पति के तिहार ला महिला मन बड़ ऊर्जा अउ धरम करम अउ संयमित रहिके मनाथे।अउ इही भाव के कारण आज धरम करम मा महिला मन पुरुष मन से कतको आगू निकल गेहे।अच्छाई फैइलथे,बुराई घटथे,घर मा सुख समृद्धि के वास होथे अउ घर परिवार समाज मा संस्कार जगथे।इही सीख देथे अगहन बृहस्पति के पूजा हा।
माँ लक्ष्मी विनती हे,बने सब के बिगड़े काज।
दीन हीन कोनो झन रहे,सब के राखव लाज।।
विजेन्द्र वर्मा
नगरगाँव(धरसीवाँ)



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