रा. सा.सा.व सां.संस्था काव्यसृजन की १००वीं काव्यगोष्ठी साहित्यिक पखवाड़े के रूप में मनाई जा रही है। जिसमें लगातार प्रतिदिन सायं काल साढ़े पाँच बजे से विभिन्न आंचलिक/ भारतीय बोली - भाषा की काव्य गोष्ठीयां आयोजित की जा रही हैं, इसी क्रम में १९अगस्त २०२१ दिन गुरुवार को काव्यसृजन दिल्ली इकाई के संयोजन में हिन्दी अवधी ब्रज भाषा के गीतों से ओत प्रोत आयोजन मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध विद्वान आदरणीय डॉ किशन तिवारी की अध्यक्षता में अपने गौरव को प्राप्त किया।
इस आयोजन की दिव्यता मुख्य अतिथि जनाब ए के शेख सर जी की अल्पकालिक उपस्थित में अनंत गुना बढ़ गई।
मुम्बई की प्रसिद्ध कवयित्री आर जे आरती सैया और कवि पं. शिवप्रकाश जौनपुरी ने संयुक्त रूप से उत्कृष्ट संचालन कर सबको आह्लादित कर दिया। संस्थापक अध्यक्ष पं.शिवप्रकाश जौनपुरी ने इस गौरवमय आयोजन का सुन्दर संयोजन किया। आयोजन की शुरुआत आरती जी ने सरस्वती वंदना से की। इसके बाद पटल पर उपस्थित कवि कवयित्री मिनाक्षी राजपुरोहित, प्रज्ञा राय, वैशाली सिंह, ए के शेख सर, शशिकला कालकर, सुमन तिवारी, रंजना करकरे, पूजा नाखरे, रश्मिलता मिश्रा, कैलाश "पर्वत" जोशी, डॉ किशन तिवारी, इंद्रा खिमेसरा, मंजू प्रभात लोढ़ा, सुमन प्रभा, आर जे आरती सैया हिरांसी, अंजनी कुमार द्विवेदी रसिक, मनिंदर सरकार, श्रीधर मिश्र, पं. शिवप्रकाश जौनपुरी, हौंसिला प्रसाद अन्वेशी, सौरभ दत्ता जयंत, आनंद पांडेय केवल, मोतीलाल बजाज, रेखा पांडेय आदि ने हिन्दी भोजपुरी अवधी ब्रज भाषा से ओतप्रोत सुंदर गीतों की अद्भुत प्रस्तुति कर काव्य सृजन के पटल पर अपनी मीठी तथा शौर्य गाथाओं से परिपूर्ण करते इस आयोजन को चिर स्मर्णीय बना दिया।
आज के आयोजन कि विशेषता यह रही कि संचालक अल्प कालिक मुख्य अतिथि अल्पकालिक अध्यक्ष भी अल्पकालिक रहे। यह भी एक अविस्मरणीय संयोग कहा जा सकता है। आखिर में ए सब जवाबदारियाँ पं.शिवप्रकाश जौनपुरी ने बड़े ही सलीके से सम्हाला। सभी को काव्यपाठ भी कराया और सबकी रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए सबका उत्साहवर्धन भी किया।
अंत में संस्था के कार्याध्यक्ष आदरणीय अंजनी कुमार द्विवेदी "रसिक" ने सभी कवि - कवयित्रियों व श्रोताओं का आभार प्रकट किया और निवेदन किया कि हमारे इस साहित्यिक शब्दार्चन के साथ ही भविष्य के विविध आयोजनों मे आप सबका स्नेह और सहयोग सदैव अपेक्षित है।
काव्य सृजन संस्था ने अपने इस आयोजन में हर दिन बंगाली , मराठी, राजस्थानी, भोजपुरी , लोकगीत, राष्ट्रीय हिन्दी गीत, बहुभाषी काव्य गोष्ठी, पुस्तक चर्चा , सम्मान समारोह आदि विभिन्न कार्यक्रमों को इस पखवाडा आयोजन में सुंदर ढंग से पिरोते इसे सामजिक समरसता के राष्ट्रीय सामाजिक सरोकारों से जोड़ते सार्थक स्वरूप प्रदान किया हैं, जिसके लिए काव्य सृजन अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाते प्रगति पथ पर अग्रसर हैं।
Comments
Post a Comment