रा. सा.सा.व सां.संस्था काव्यसृजन की १००वीं काव्यगोष्ठी साहित्यिक पखवाड़े के रूप में मनाई जा रही है। जिसमें लगातार प्रतिदिन सायं काल साढ़े पाँच बजे से विभिन्न आंचलिक/ भारतीय बोली - भाषा की काव्य गोष्ठीयां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में २० अगस्त २०२१ दिन शुक्रवार को काव्यसृजन के संयोजन में "बहुभाषीय" हिन्दी, कच्छी, मराठी, बांग्ला, अवधी, ब्रज भाषा के गीतों से ओत प्रोत आयोजन मुम्बई के प्रसिद्ध विद्वान आदरणीय हौंसिला प्रसाद अन्वेषी की अध्यक्षता में अपने गौरव को प्राप्त किया।
इस आयोजन की दिव्यता मुख्य अतिथि आदरणीय राजेश उपाध्याय "नाईस म्युजिक" के निर्देशक की पूर्णकालिक उपस्थित में अनंत गुना बढ़ गई।
मुम्बई की प्रसिद्ध कवयित्री आर जे आरती सैया ने उत्कृष्ट संचालन कर सबको आह्लादित कर दिया। संस्थापक अध्यक्ष पं.शिवप्रकाश जौनपुरी ने इस गौरवमय आयोजन का सुन्दर संयोजन किया। आयोजन की शुरुआत आरती ने सरस्वती वंदना से की। इसके बाद पटल पर उपस्थित कवि कवयित्री,शशिकला कालकर,नम्रता श्रीवास्तव,सत्यवती मौर्या,मृदुला मिश्रा,चैतन्या कुमारी,ब्रिजेन्द्र नरायण दूबे,शारदा प्रसाद दूबे, विनय शर्मा दीप, विधुभूषण त्रिवेदी विधु, माता प्रसाद शर्मा, डॉ श्रीहरि वाणी, रंजना ककरकरे,आर जे आरती सैया हिरांसी,अंजनी कुमार द्विवेदी रसिक, मनिंदर सरकार, श्रीधर मिश्र,पं. शिवप्रकाश जौनपुरी, हौंसिला प्रसाद अन्वेशी, सौरभ दत्ता जयंत, आनंद पांडेय केवल, मोतीलाल बजाज आदि ने हिन्दी भोजपुरी अवधी ब्रज भाषा से ओतप्रोत सुंदर गीतों की अद्भुत प्रस्तुति कर काव्य सृजन के पटल पर अपनी मीठी तथा शौर्य गाथाओं से परिपूर्ण करते इस आयोजन को चिरस्मर्णीय बना दिया।
मुख्य अतिथि आदरणीय राजेश उपाध्याय ने अपनी पूर्ण कालिक उपस्थिती से कवियों में आयोजन में स्फूर्ति भर दिया। उन्होंने अपने उद्वोधन में संस्था के इस शतकीय महोत्सव की सराहना की और सौ मासिक काव्य गोष्ठी पूरी करने पर बधाई देते हुए कहा कि ऐसे ही संस्था शतायु बने। हृदयांगन साहित्यिक संस्था के संस्थापक अध्यक्ष विधुभूषण त्रिवेदी ने भी अपने आशिर्वचनो से संस्था को अभिभूत किया|अध्यक्ष आदरणीय हौंसिला प्रसाद अन्वेषी ने सबकी रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए सबका उत्साहवर्धन भी किया।
अंत में संस्था के कार्याध्यक्ष आदरणीय अंजनी कुमार द्विवेदी "रसिक" ने सभी कवि - कवयित्रियों व श्रोताओं का आभार प्रकट किया और निवेदन किया कि हमारे इस साहित्यिक शब्दार्चन के साथ ही भविष्य के विविध आयोजनों मे आप सबका स्नेह और सहयोग सदैव अपेक्षित है।
काव्य सृजन संस्था ने अपने इस आयोजन में हर दिन बंगाली , मराठी, राजस्थानी, भोजपुरी , लोकगीत, राष्ट्रीय हिन्दी गीत, बहुभाषी काव्य गोष्ठी, पुस्तक चर्चा , सम्मान समारोह आदि विभिन्न कार्यक्रमों को इस पखवाड़ा आयोजन में सुंदर ढंग से पिरोते इसे सामजिक समरसता के राष्ट्रीय सामाजिक सरोकारों से जोड़ते सार्थक स्वरूप प्रदान किया हैं, जिसके लिए काव्य सृजन अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाते प्रगति पथ पर अग्रसर हैं।

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